Thursday, May 07, 2026

संयुक्त परिवार




पिछले कुछ दशकों में मैंने कम ही संयुक्त परिवार देखे हैं।  माता-पिता का बेटे के परिवार का साथ रहना आज भी प्रचलित है किन्तु एक से ज्यादा बेटों का परिवार माता-पिता के साथ रहे ये अब आम नहीं है।  पारिवारिक प्रेम व सौहार्द के किस्से सुनने को मिलते हैं तो प्रसन्नता होती है।


विवाह के बाद जब मैं ससुराल आई तो ये जानना मुश्किल था की कौन इनके अपने  हैं व कौन चचेरे भाई बहिन है। ऊपर से किसी बात पे मेरी सासजी बोली की उनके आठ बेटे व छे बेटियों है। थोड़ी देर के लिए मैं स्तब्ध ही रह गयी थी। सब भाई बहिन थे व चचेरा शब्द की आवशयकता नहीं होती थी I हंसी मज़ाक  से भरपूर परिवार हृषिकेश मुखर्जी की कोई फिल्म सा लगता था। मेरे पति के बचपन की सुखद यादों में उनके दीदी व भाइयों  का ज़िक्रे हमेशा रहता है। जन्म के बाद सबसे पहले अपनी दीदी की गोद में ही आये थे जो उस समय कक्षा १० में पढ़ती थी और अपनी चाची की सेवा टहल के किये तत्पर थीं।


पहाड़ों में जाड़ों में  लम्बी छुट्टियां होती है तो ये अपने (चचेरे) बड़े भाइयों के पास हरिद्वार व बिजनौर चले जाते थे और वहां खूब मज़े करते थे, ऐसा मेने सुना है।  


रूड़की यूनिवर्सिटी से  ऍम एस सी करने के बाद IIT कानपुर में पी एच डी  इंटरव्यू के लिए आना था माता पिताजी दूर रहते थेऔर समय कम था, तो ट्रैन टिकट के लिए अपने चचेरे बड़े भाई  साहेब को ही निःसंकोच पत्र लिखा था। फ़ोन का ऑप्शन नहीं रहा होगा और चिट्ठी भी देर सवेर पहुंचती  होगी।  लेकिन जाने के ठीक एक दिन पहले भाई साहेब  के छोटे भाई रुपए ले कर पहुंचे  और ये समय से IIT  कानपुर पहुँच पाए।  रुपयों के साथ स्नेह व सद्भावना भी भेजी होगी।  पिता व बड़ा भाई एक समान होता है ये देख कर/सुनकर मन गदगद होता है।  


अपने IIT  कैंपस में एक प्रोफेसर साहेब के घर दो वृद्ध महिलाओं को देखा तो अनुमान लगाना सरल था की एक तो उनकी माँ होंगी और  दूसरी? दूसरी उनकी ताईजी थी।  दोनों सुखपूर्वक बागवानी करती व टहलती हुई दिखाई देती थी।  


कुछ दिनों पूर्व मैँ अपनी एक सहेली के घर बैठी थी जो अपने प्रोफेसर बेटे के साथ रहती हैं।  थोड़ी देर में एक वृद्ध शाम की सैर से वापस आये और अपने कमरे में चले गए ।  पूछने  पे पता चला की वो प्रोफेसर साहेब के ताऊजी है जो अविवाहित हैं व रिटायरमेंट के बाद साथ ही रहते है।  

आज  के परिवेश में  ऐसे उदहारण  प्रशंसनीय हैं।

                                                                          

        appeared in Women's Association IIT K Newsletter May'26




5 comments:

Anonymous said...

बहुत सुंदर आत्मकथा जैसी कहानी पढकर खुशी हुई। लिखती रहिये । शुभाशीष और शुभकामनाएं। -GPB

Anonymous said...

Asmi mei Sanyukta parivar padha. Kafi achha laga. Proud of you Vandana🤗 ----Niyati

Anonymous said...

अति सुंदर लेख -Archana

Anonymous said...

Wah ma’am 😊 aisa article dekhkar lagta hai aapke andar ek writer chhupa hua hai 👍 aapne apne thoughts bahut achhe se express kiye hain ✨ aapka personal experience padhkar bahut accha laga 💫 ❤️

Anonymous said...

Sach me sanyukt parivaar ka mazaa hi kuch alag hota hai -Sanchita